अमर उजाला काव्य डेस्क
मिट्टी मिलती जनाब मिट्टी में
दफ़्न सारे नवाब मिट्टी में
जब भी डाला है आब मिट्टी में
खिलता देखा गुलाब मिट्टी में
- मीना भट्ट
हम इस कदर यार को मनाने निकले
उसकी चाहत के हम दिवाने निकले..
जब भी उसे दिल का हाल बताना चाहा हमने
उसके होठों से वक़्त न होने के बहाने निकले
- मनीष राज
इतनी रस्में हैं देखकर आदमी डर जाता है
सभी को निभाते हुए दम निकल जाता है।
- शिवचरण दास
तू जो दे तो तेरी मर्जी
ना दे तो कोई रंजो-मलाल नहीं,
तेरे फैसले लाज़वाब हैं
तेरे फैसले पर कोई सवाल नहीं!
- बशर
Josh Malihabadi Poetry: चुनिंदा शेर