Kaifi Azmi Poetry: तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या ग़म है जिस को छुपा रहे हो

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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तू अपने दिल की जवाँ धड़कनों को गिन के बता
मिरी तरह तिरा दिल बे-क़रार है कि नहीं 

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जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँ
यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता 

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जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े 

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बस इक झिजक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में
कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फ़साने में 

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Urdu Poetry: दिल को तिरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है

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