अमर उजाला
Mon, 28 July 2025
मुझे अब तुम से डर लगने लगा है
तुम्हें मुझ से मोहब्बत हो गई क्या
~जौन एलिया
ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को
ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
~ख़ुमार बाराबंकवी
ज़बान दिल की हक़ीक़त को क्या बयाँ करती
किसी का हाल किसी से कहा नहीं जाता
~ अज़ीज़ लखनवी
इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए
आप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए
~मुनव्वर राना
Urdu Poetry: जो कि पेशानी पे लिक्खी है वो पेश आनी है