Hindi Shayari: 'दिसंबर' महीने पर कहे गए शेर

अमर उजाला

Mon, 18 December 2023

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यादों की शाल ओढ़ के आवारा-गर्दियाँ
काटी हैं हम ने यूँ भी दिसम्बर की सर्दियाँ

~अज्ञात
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धड़कता तो है मुस्कुराता नहीं
दिसम्बर मुझे रास आता नहीं

~ मोहसिन नक़वी

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बर्फ़ की तरह दिसम्बर का सफ़र होता है
हम उसे साथ न लेते तो रज़ाई लेते

~ राहत इंदौरी
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मैं एक बोरी में लाया हूँ भर के मूँग-फली
किसी के साथ दिसम्बर की रात काटनी है

~ अज़ीज़ फ़ैसल
 

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दिसम्बर की सर्दी है उस के ही जैसी
ज़रा सा जो छू ले बदन काँपता है

~ अमित शर्मा मीत

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हर दिसम्बर इसी वहशत में गुज़ारा कि कहीं
फिर से आँखों में तिरे ख़्वाब न आने लग जाएँ

~ रेहाना रूही

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