Urdu Poetry: शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा
सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
- शकील जमाली 

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गर्मी लगी तो ख़ुद से अलग हो के सो गए
सर्दी लगी तो ख़ुद को दोबारा पहन लिया
- बेदिल हैदरी 

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शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए
ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए
- राहत इंदौरी 

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सर्दी और गर्मी के उज़्र नहीं चलते
मौसम देख के साहब इश्क़ नहीं होता
- मुईन शादाब 

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