Urdu Poetry: सारी दुनिया हमें पहचानती है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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सारी दुनिया हमें पहचानती है
कोई हम सा भी न तन्हा होगा
- अहमद नदीम क़ासमी  

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हम अंजुमन में सब की तरफ़ देखते रहे
अपनी तरह से कोई अकेला नहीं मिला
- मुस्तफ़ा ज़ैदी

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पुकारा जब मुझे तन्हाई ने तो याद आया
कि अपने साथ बहुत मुख़्तसर रहा हूँ मैं
- फ़ारिग़ बुख़ारी

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यादों की महफ़िल में खो कर
दिल अपना तन्हा तन्हा है
- आज़ाद गुलाटी

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बेहतर तो है यही कि न दुनिया से दिल लगे
पर क्या करें जो काम न बे-दिल-लगी चले
- शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

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कोई दिल-लगी दिल लगाना नहीं है
क़यामत है ये दिल का आना नहीं है
- दत्तात्रिया कैफ़ी

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Urdu Poetry: ऐश ही ऐश है न सब ग़म है

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