Urdu Poetry: ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को, अपने अंदाज़ से गँवाने का

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को
अपने अंदाज़ से गँवाने का
- जौन एलिया

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दर्द ऐसा है कि जी चाहे है ज़िंदा रहिए
ज़िंदगी ऐसी कि मर जाने को जी चाहे है
- कलीम आजिज़

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ज़िंदगी क्या है आज इसे ऐ दोस्त
सोच लें और उदास हो जाएँ
- फ़िराक़ गोरखपुरी

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ज़िंदगी शम्अ की मानिंद जलाता हूँ 'नदीम'
बुझ तो जाऊँगा मगर सुबह तो कर जाऊँगा
- अहमद नदीम क़ासमी

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कुछ दिन से ज़िंदगी मुझे पहचानती नहीं
यूँ देखती है जैसे मुझे जानती नहीं
- अंजुम रहबर

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मौत ख़ामोशी है चुप रहने से चुप लग जाएगी
ज़िंदगी आवाज़ है बातें करो बातें करो
- अहमद मुश्ताक़

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Urdu Poetry: अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए

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