अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
गिरा दिया है तो साहिल पे इंतिज़ार न कर
अगर वो डूब गया है तो दूर निकलेगा
- अमीर क़ज़लबाश
उमीद-ओ-बीम के मेहवर से हट के देखते हैं
ज़रा सी देर को दुनिया से कट के देखते हैं
- इफ़्तिख़ार आरिफ़
जो पूरे होने से रह गए थे वो ख़्वाब रक्खे हुए हैं घर में
यक़ीन मानो पुरानी रुत के गुलाब रक्खे हुए हैं घर में
- मोहम्मद मुबशशिर मेयो
तन्हाई में करनी तो है इक बात किसी से
लेकिन वो किसी वक़्त अकेला नहीं होता
- अहमद मुश्ताक़
Urdu Poetry: करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाम