अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है
मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी
- जावेद अख़्तर
ज़िंदगी ख़्वाब देखती है मगर
ज़िंदगी ज़िंदगी है ख़्वाब नहीं
- शबनम रूमानी
इक ख़्वाब ही तो था जो फ़रामोश हो गया
इक याद ही तो थी जो भुला दी गई तो क्या
- इफ़्तिख़ार आरिफ़
आँखें खुलीं तो जाग उठीं हसरतें तमाम
उस को भी खो दिया जिसे पाया था ख़्वाब में
- सिराज लखनवी
Urdu Poetry: रह गए लाखों कलेजा थाम कर, आँख जिस जानिब तुम्हारी उठ गई