Urdu Poetry: मैं तेरे कहे से चुप हूँ लेकिन

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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मैं तेरे कहे से चुप हूँ लेकिन
चुप भी तो बयान-ए-मुद्दआ है
- अहमद नदीम क़ासमी   

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हमारे ख़्वाब चोरी हो गए हैं
हमें रातों को नींद आती नहीं है
- बख़्श लाइलपुरी 

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तुम अज़ीज़ और तुम्हारा ग़म भी अज़ीज़
किस से किस का गिला करे कोई
- हादी मछलीशहरी

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शाम को तेरा हँस कर मिलना
दिन भर की उजरत होती है
- इशरत आफ़रीं

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Urdu Poetry: होश उड़ जाते हैं अब भी तिरी आवाज़ के साथ

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