अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद
बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता
- दाग़ देहलवी
यार पर इल्ज़ाम कैसा ऐ दिल-ए-ख़ाना-ख़राब
जो किया तुझ से तिरी क़िस्मत ने उस ने क्या किया
- लाला माधव राम जौहर
प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है
- हस्तीमल हस्ती
तुम मोहब्बत को खेल कहते हो
हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
- बशीर बद्र
Urdu Poetry: अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता