Urdu Poetry: हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा'द ये मा'लूम

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा'द ये मा'लूम
कि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी
- अहमद फ़राज़ 

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सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं
और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं
- जौन एलिया 

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मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा
सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए
- कृष्ण बिहारी नूर 

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तुम से बिछड़ कर ज़िंदा हैं
जान बहुत शर्मिंदा हैं
- इफ़्तिख़ार आरिफ़ 

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Urdu Poetry: गिला भी तुझ से बहुत है मगर मोहब्बत भी

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