अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
जिसे न आने की क़स्में मैं दे के आया हूँ
उसी के क़दमों की आहट का इंतिज़ार भी है
- जावेद नसीमी
कोई हलचल है न आहट न सदा है कोई
दिल की दहलीज़ पे चुप-चाप खड़ा है कोई
- ख़ुर्शीद अहमद जामी
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए
- दुष्यंत कुमार
सब से पुर-अम्न वाक़िआ ये है
आदमी आदमी को भूल गया
- जौन एलिया
Urdu Poetry: मुसीबत का पहाड़ आख़िर किसी दिन कट ही जाएगा