अमर उजाला काव्य डेस्क
आज देखा है तुझ को देर के बअ'द
आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
मुझे ये डर है तिरी आरज़ू न मिट जाए
बहुत दिनों से तबीअत मिरी उदास नहीं
Urdu Poetry: काग़ज़ पर कहे चुनिंदा शेर