Urdu Poetry: नासिर काज़मी के चुनिंदा शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क

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दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया 

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आज देखा है तुझ को देर के बअ'द
आज का दिन गुज़र जाए कहीं

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वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का
जो पिछली रात से याद रहा है 

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जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया 

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मुझे ये डर है तिरी आरज़ू मिट जाए
बहुत
दिनों से तबीअत मिरी उदास नहीं 

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Urdu Poetry: काग़ज़ पर कहे चुनिंदा शेर

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