Urdu Poetry: दिल धड़कने का सबब याद आया वो तिरी याद थी अब याद आया

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
- नासिर काज़मी 

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करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाम
मुझे तो और कोई काम भी नहीं आता
- ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

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हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगे
अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ
- क़तील शिफ़ाई

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क्या कहा इश्क़ जावेदानी है!
आख़िरी बार मिल रही हो क्या
- जौन एलिया

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Urdu Poetry: ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

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