Urdu Poetry: इश्क़ भी खेल है नसीबों का ख़ाक हो जाएँ कीमिया हो जाएँ

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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इश्क़ भी खेल है नसीबों का
ख़ाक हो जाएँ कीमिया हो जाएँ
- अहमद फ़राज़ 

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बस मुझे यूँही इक ख़याल आया
सोचती हो तो सोचती हो क्या
- जौन एलिया

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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
- निदा फ़ाज़ली

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इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है
सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है
- जिगर मुरादाबादी

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Urdu Poetry: जिस को भी देखना हो कई बार देखना

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