Urdu Poetry: क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम

अमर उजाला काव्य डेस्क. नई दिल्ली 

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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है
क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
- साहिर लुधियानवी  

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हम ग़म-ज़दा हैं लाएँ कहाँ से ख़ुशी के गीत
देंगे वही जो पाएँगे इस ज़िंदगी से हम
- साहिर लुधियानवी

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बड़ा घाटे का सौदा है 'सदा' ये साँस लेना भी
बढ़े है उम्र ज्यूँ-ज्यूँ ज़िंदगी कम होती जाती है
- सदा अम्बालवी

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ऐ अदम के मुसाफ़िरो होशियार
राह में ज़िंदगी खड़ी होगी
- साग़र सिद्दीक़ी

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Urdu Poetry: हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है

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