Urdu Poetry: ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है
ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है
- बशीर बद्र  

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सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं
और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं
- जौन एलिया

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हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया
- साहिर लुधियानवी

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क्या कहा इश्क़ जावेदानी है!
आख़िरी बार मिल रही हो क्या
- जौन एलिया

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दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
- जिगर मुरादाबादी

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मोहब्बत करने वाले कम न होंगे
तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
- हफ़ीज़ होशियारपुरी

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