Urdu Poetry: मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा
- परवीन शाकिर

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पत्थर मुझे कहता है मिरा चाहने वाला
मैं मोम हूँ उस ने मुझे छू कर नहीं देखा
- बशीर बद्र

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कौन सी बात है तुम में ऐसी
इतने अच्छे क्यूँ लगते हो
- मोहसिन नक़वी

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अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे
मिरे अंदर से सभी रंग तुम्हारे निकले
- सालिम सलीम

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तुम फिर उसी अदा से अंगड़ाई ले के हँस दो
आ जाएगा पलट कर गुज़रा हुआ ज़माना
- शकील बदायूंनी 

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यूँ तिरी याद में दिन रात मगन रहता हूँ
दिल धड़कना तिरे क़दमों की सदा लगता है
- शहज़ाद अहमद

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Urdu Poetry: मैं जागता हूँ तिरा ख़्वाब देखने के लिए

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