Urdu Poetry: तू कहानी ही के पर्दे में भली लगती है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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तू कहानी ही के पर्दे में भली लगती है
ज़िंदगी तेरी हक़ीक़त नहीं देखी जाती
- अख़्तर सईद ख़ान 

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ज़िंदगी जब अज़ाब होती है
आशिक़ी कामयाब होती है
- दुष्यंत कुमार

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मौत क्या एक लफ़्ज़-ए-बे-मअ'नी
जिस को मारा हयात ने मारा
- जिगर मुरादाबादी

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जो पढ़ा है उसे जीना ही नहीं है मुमकिन
ज़िंदगी को मैं किताबों से अलग रखता हूँ
- ज़फ़र सहबाई

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'मुनीर' इस ख़ूबसूरत ज़िंदगी को
हमेशा एक सा होना नहीं है
- मुनीर नियाज़ी

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अहल-ए-दिल के वास्ते पैग़ाम हो कर रह गई
ज़िंदगी मजबूरियों का नाम हो कर रह गई
- गणेश बिहारी तर्ज़

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Urdu Poetry: मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा

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