Urdu Poetry: हम ने घर की सलामती के लिए

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

Image Credit :

हम ने घर की सलामती के लिए
ख़ुद को घर से निकाल रक्खा है
- अज़हर अदीब   

Image Credit :

उन दिनों घर से अजब रिश्ता था
सारे दरवाज़े गले लगते थे
- मोहम्मद अल्वी

Image Credit :

ख़ुद-बख़ुद राह लिए जाती है उस की जानिब
अब कहाँ तक है रसाई मुझे मालूम नहीं
- मोहम्मद आज़म

Image Credit :

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं
- फ़िराक़ गोरखपुरी

Image Credit :

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो
क्या ग़म है जिस को छुपा रहे हो
- कैफ़ी आज़मी

Image Credit :

तेरे आने की जब ख़बर महके
तेरी ख़ुशबू से सारा घर महके
- नवाज़ देवबंदी   

Image Credit :

Urdu Poetry: दिल के आँगन में उभरता है तिरा अक्स-ए-जमील

Read Now