Urdu Poetry: मैं ने समझा था कि लौट आते हैं जाने वाले

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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मैं ने समझा था कि लौट आते हैं जाने वाले
तू ने जा कर तो जुदाई मिरी क़िस्मत कर दी
- अहमद नदीम क़ासमी

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मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखा
उस को छुट्टी न मिले जिस को सबक़ याद रहे
- मीर ताहिर अली रिज़वी

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तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा
- बशीर बद्र 

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इक ख़्वाब ही तो था जो फ़रामोश हो गया
इक याद ही तो थी जो भुला दी गई तो क्या
- इफ़्तिख़ार आरिफ़ 

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