Urdu Poetry: फिर भी लोग ख़ुदाओं जैसी बातें करते हैं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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ख़ुद को बिखरते देखते हैं कुछ कर नहीं पाते हैं
फिर भी लोग ख़ुदाओं जैसी बातें करते हैं
- इफ़्तिख़ार आरिफ़ 

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बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है
हर आदमी में कोई दूसरा भी होता है
- अनवर शऊर

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क्या तिरे शहर के इंसान हैं पत्थर की तरह
कोई नग़्मा कोई पायल कोई झंकार नहीं
- कामिल बहज़ादी

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हम लोगों को पानी अच्छा लगता है
हम लोगों ने मिट्टी पहनी हुई है दोस्त
- नईम सरमद

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ये इल्तिजा दुआ ये तमन्ना फ़ुज़ूल है
सूखी नदी के पास समुंदर न जाएगा
- हयात लखनवी

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दुनिया तो चाहती है यूँही फ़ासले रहें
दुनिया के मश्वरों पे न जा उस गली में चल
- हबीब जालिब

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Urdu Poetry: उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं

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