अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
चले तो पाँव के नीचे कुचल गई कोई शय
नशे की झोंक में देखा नहीं कि दुनिया है
- शहाब जाफ़री
बेहतर तो है यही कि न दुनिया से दिल लगे
पर क्या करें जो काम न बे-दिल-लगी चले
- शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
दुनिया ने किस का राह-ए-फ़ना में दिया है साथ
तुम भी चले चलो यूँही जब तक चली चले
- शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
इक दर्द-ए-मोहब्बत है कि जाता नहीं वर्ना
जिस दर्द की ढूँढ़े कोई दुनिया में दवा है
- मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
आज भी बुरी क्या है कल भी ये बुरी क्या थी
इस का नाम दुनिया है ये बदलती रहती है
- एजाज़ सिद्दीक़ी
फ़िक्र-ए-दुनिया में सर खपाता हूँ
मैं कहाँ और ये वबाल कहाँ
- मिर्ज़ा ग़ालिब
Urdu Poetry: मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा