अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को
मैं ने औरों से सुना है कि परेशान हूँ मैं
- आसी उल्दनी
हम जैसों को बस इतनी इजाज़त है मिरे दोस्त
हम देख ही सकते हैं पसंद आया हुआ शख़्स
- आमिर रहमती
उसे हुनर है निगाहों से बात करने का
मैं बे-ज़बान सा लगता हूँ ये ज़बान लिए
- अन्नू रिज़वी
कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा
मुझे मालूम है क़िस्मत का लिक्खा भी बदलता है
- बशीर बद्र
बद-क़िस्मती को ये भी गवारा न हो सका
हम जिस पे मर मिटे वो हमारा न हो सका
- शकेब जलाली
ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है
- फ़ानी बदायूंनी
Urdu Poetry: हमारी मुस्कुराहट पर न जाना