Urdu Poetry: जो दिल जलाए बहुत फिर भी दिलरुबा ही लगे

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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हसीं तो और हैं लेकिन कोई कहाँ तुझ सा
जो दिल जलाए बहुत फिर भी दिलरुबा ही लगे
- बशीर बद्र  

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सुना है उस के बदन की तराश ऐसी है
कि फूल अपनी क़बाएँ कतर के देखते हैं
- अहमद फ़राज़ 

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डर हम को भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से
लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा
- जावेद अख़्तर

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आप के शहर में सूरज तो निकलने से रहा
एक मशअ'ल ही मिरे हात में रहने दीजे
- सग़ीर रियाज़ 

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Urdu Poetry: तू ग़मों का मेरे इलाज कर मिरी बात सुन तू अभी न जा

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