अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं
सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं
- गुलज़ार
ख़्वाबों पर इख़्तियार न यादों पे ज़ोर है
कब ज़िंदगी गुज़ारी है अपने हिसाब में
- फ़ातिमा हसन
इक मोहब्बत की ये तस्वीर है दो रंगों में
शौक़ सब मेरा है और सारी हया उस की है
- जावेद अख़्तर
सब को पहुँचा के उन की मंज़िल पर
आप रस्ते में रह गया हूँ मैं
- अब्दुल हमीद अदम
Urdu Poetry: मुझ को औरों से कुछ नहीं है काम, तुझ से हर दम उमीद-वारी है