अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मुझ को औरों से कुछ नहीं है काम
तुझ से हर दम उमीद-वारी है
- फ़ाएज़ देहलवी
खुली किताब थी फूलों-भरी ज़मीं मेरी
किताब मेरी थी रंग-ए-किताब उस का था
- वज़ीर आग़ा
वो नहीं है न सही तर्क-ए-तमन्ना न करो
दिल अकेला है इसे और अकेला न करो
- महमूद अयाज़
पुराने यार भी आपस में अब नहीं मिलते
न जाने कौन कहाँ दिल लगा के बैठ गया
- फ़ाज़िल जमीली
Urdu Poetry: कौन सी बात है तुम में ऐसी, इतने अच्छे क्यूँ लगते हो