अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
आदमी आदमी से मिलता है
दिल मगर कम किसी से मिलता है
- जिगर मुरादाबादी
उस की आँखों को ग़ौर से देखो
मंदिरों में चराग़ जलते हैं
- बशीर बद्र
आँखें जो उठाए तो मोहब्बत का गुमाँ हो
नज़रों को झुकाए तो शिकायत सी लगे है
- जाँ निसार अख़्तर
जिसे न आने की क़स्में मैं दे के आया हूँ
उसी के क़दमों की आहट का इंतिज़ार भी है
- जावेद नसीमी
Urdu Poetry: चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले