Urdu Poetry: ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं
- माहिरुल क़ादरी

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गुमशुदगी ही अस्ल में यारो राह-नुमाई करती है
राह दिखाने वाले पहले बरसों राह भटकते हैं
- हफ़ीज़ बनारसी

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गो आबले हैं पाँव में फिर भी ऐ रहरवो
मंज़िल की जुस्तुजू है तो जारी रहे सफ़र
- नूर क़ुरैशी

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क़तरा न हो तो बहर न आए वजूद में
पानी की एक बूँद समुंदर से कम नहीं
- जुनैद हज़ीं लारी

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काँटे बोने वाले सच-मुच तू भी कितना भोला है
जैसे राही रुक जाएँगे तेरे काँटे बोने से
- मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

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तुझे भुला के भी सदियाँ भुला नहीं सकतीं
मगर ये शर्त है ख़ुद में कमाल पैदा कर
- शाद फ़िदाई देहलवी

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Urdu Poetry: कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी

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