अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
वो आ रहे हैं वो आते हैं आ रहे होंगे
शब-ए-फ़िराक़ ये कह कर गुज़ार दी हम ने
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो
मैं दिल किसी से लगा लूँ अगर इजाज़त हो
- जौन एलिया
हमारे ऐब ने बे-ऐब कर दिया हम को
यही हुनर है कि कोई हुनर नहीं आता
- मिर्ज़ा रज़ा बर्क़
बड़े सीधे-साधे बड़े भोले-भाले
कोई देखे इस वक़्त चेहरा तुम्हारा
- आग़ा शाइर क़ज़लबाश
Urdu Poetry: तुम अगर फूल न होते तो हमारे होते