Urdu Poetry: हमारे घर की दीवारों पे 'नासिर' उदासी बाल खोले सो रही है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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हमारे घर की दीवारों पे 'नासिर'
उदासी बाल खोले सो रही है
- नासिर काज़मी  

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कोई तो ऐसा घर होता जहाँ से प्यार मिल जाता
वही बेगाने चेहरे हैं जहाँ जाएँ जिधर जाएँ
- साहिर लुधियानवी 

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इक शजर ऐसा मोहब्बत का लगाया जाए
जिस का हम-साए के आँगन में भी साया जाए
- ज़फर ज़ैदी 

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अगर ऐ नाख़ुदा तूफ़ान से लड़ने का दम-ख़म है
इधर कश्ती न ले आना यहाँ पानी बहुत कम है
- दिवाकर राही 

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Urdu Poetry: इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे

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