Urdu Poetry: तुम्हारे नाम की इक ख़ूब-सूरत शाम हो जाए

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए
तुम्हारे नाम की इक ख़ूब-सूरत शाम हो जाए
- बशीर बद्र 

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बदले हुए से लगते हैं अब मौसमों के रंग
पड़ता है आसमान का साया ज़मीन पर
- हमदम कशमीरी 

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आने में सदा देर लगाते ही रहे तुम
जाते रहे हम जान से आते ही रहे तुम
- रासिख़ अज़ीमाबादी 

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ऐश ही ऐश है न सब ग़म है
ज़िंदगी इक हसीन संगम है
- अली जवाद ज़ैदी

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