Urdu Poetry: आज भी शायद कोई फूलों का तोहफ़ा भेज दे

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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आज भी शायद कोई फूलों का तोहफ़ा भेज दे
तितलियाँ मंडला रही हैं काँच के गुल-दान पर
- शकेब जलाली  

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तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा
मुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है
- अमीर मीनाई 

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तुम ज़माने की राह से आए
वर्ना सीधा था रास्ता दिल का
- बाक़ी सिद्दीक़ी 

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कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा
- इब्न-ए-इंशा

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Happy New Year: तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई

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