अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
दूसरों पर अगर तब्सिरा कीजिए
सामने आइना रख लिया कीजिए
- ख़ुमार बाराबंकवी
गो बरसती नहीं सदा आँखें
अब्र तो बारा मास होता है
- गुलज़ार
यहाँ किसी को भी कुछ हस्ब-ए-आरज़ू न मिला
किसी को हम न मिले और हम को तू न मिला
- ज़फ़र इक़बाल
हम किसी को गवाह क्या करते
इस खुले आसमान के आगे
- रसा चुग़ताई
Urdu Poetry: आदमी आदमी से मिलता है, दिल मगर कम किसी से मिलता है