Urdu Poetry: वो सो गया है मुझे ख़्वाब से जगाते हुए

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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कहानी लिखते हुए दास्ताँ सुनाते हुए
वो सो गया है मुझे ख़्वाब से जगाते हुए
- सलीम कौसर

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रात को सोना न सोना सब बराबर हो गया
तुम न आए ख़्वाब में आँखों में ख़्वाब आया तो क्या
- जलील मानिकपुरी 

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ढलेगी शाम जहाँ कुछ नज़र न आएगा
फिर इस के बाद बहुत याद घर की आएगी
- राजेन्द्र मनचंदा बानी 

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मैं ज़िंदगी की दुआ माँगने लगा हूँ बहुत
जो हो सके तो दुआओं को बे-असर कर दे
- इफ़्तिख़ार आरिफ़

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Urdu Poetry: ज़िंदगी जब अज़ाब होती है आशिक़ी कामयाब होती है

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