Urdu Poetry: पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
- मीर तक़ी मीर  

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ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम
मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते हैं
- इमाम बख़्श नासिख़ 

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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
- ख़्वाजा मीर दर्द 

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मुसाफ़िरों से मोहब्बत की बात कर लेकिन
मुसाफ़िरों की मोहब्बत का ए'तिबार न कर
- उमर अंसारी

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Urdu Poetry: कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए

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