अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
इतने मायूस तो हालात नहीं
लोग किस वास्ते घबराए हैं
- जाँ निसार अख़्तर
थकना भी लाज़मी था कुछ काम करते करते
कुछ और थक गया हूँ आराम करते करते
- ज़फ़र इक़बाल
लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से
तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से
- जाँ निसार अख़्तर
मुझे तन्हाई की आदत है मेरी बात छोड़ें
ये लीजे आप का घर आ गया है हाथ छोड़ें
- जावेद सबा
Urdu Poetry: सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं