Urdu Poetry: मैंने उस की तरफ़ से ख़त लिक्खा और अपने पते पे भेज दिया

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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मैंने उस की तरफ़ से ख़त लिक्खा
और अपने पते पे भेज दिया
- फ़हमी बदायूंनी 

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कुछ मधुर तानें फ़ज़ा में थरथरा कर रह गईं
धान के खेतों में चंचल पंछियों का शोर था
- अब्दुर्रहीम नश्तर 

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ये जब है कि इक ख़्वाब से रिश्ता है हमारा
दिन ढलते ही दिल डूबने लगता है हमारा
- शहरयार

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इक और खेत पक्की सड़क ने निगल लिया
इक और गाँव शहर की वुसअत में खो गया
- ख़ालिद सिद्दीक़ी 

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Urdu Poetry: तिरे वा'दों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए

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