अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
परेशानी अगर है तो परेशानी का हल भी है
परेशाँ-हाल रहने से परेशानी नहीं जाती
- अबरार अहमद काशिफ़
मैं आज ज़द पे अगर हूँ तो ख़ुश-गुमान न हो
चराग़ सब के बुझेंगे हवा किसी की नहीं
-अहमद फ़राज़
किसे ख़बर थी कि ये वाक़िआ भी होना था
कि खेल खेल में इक हादसा भी होना था
- अज्ञात
मुझ से तू पूछने आया है वफ़ा के मअ'नी
ये तिरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को
- क़तील शिफ़ाई
Urdu Poetry: मौसम तुम्हारे साथ का जाने किधर गया