Urdu Poetry: ख़ुद बनाता है जहाँ में आदमी अपनी जगह

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह
ख़ुद बनाता है जहाँ में आदमी अपनी जगह
- अनवर शऊर 

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भीड़ तन्हाइयों का मेला है
आदमी आदमी अकेला है
- सबा अकबराबादी 

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रफ़ाक़तों का मिरी उस को ध्यान कितना था
ज़मीन ले ली मगर आसमान छोड़ गया
- परवीन शाकिर   

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बिछड़ के तुझ से मुझे है उमीद मिलने की
सुना है रूह को आना है फिर बदन की तरफ़
- नज़्म तबातबाई 

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Urdu Poetry: दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे

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