Urdu Poetry: हम परिंदों से हुनर छीनेगा कौन

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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हम परिंदों से हुनर छीनेगा कौन
जल गया इक घर तो सौ घर बन गए
- ज़ीनतउल्लाह जावेद 

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फूल गुल शम्स ओ क़मर सारे ही थे
पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत
- मीर तक़ी मीर 

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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो
हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
- बशीर बद्र

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गँवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैं ने
वो कौन है जिसे देखा नहीं कभी मैं ने
- जौन एलिया

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Urdu Poetry: धीमे सुरों में कोई मधुर गीत छेड़िए

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