Urdu Poetry: यूँ जो तकता है आसमान को तू, कोई रहता है आसमान में क्या

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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यूँ जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या
- जौन एलिया 

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ऐ आसमान तेरे ख़ुदा का नहीं है ख़ौफ़
डरते हैं ऐ ज़मीन तिरे आदमी से हम
- अज्ञात 

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जब ज़रा रात हुई और मह ओ अंजुम आए
बार-हा दिल ने ये महसूस किया तुम आए
- असद भोपाली 

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कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा
मुझे मालूम है क़िस्मत का लिक्खा भी बदलता है
- बशीर बद्र 

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