Urdu Poetry: बस एक शख़्स को माँगा मुझे वही न मिला

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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ख़ुदा की इतनी बड़ी काएनात में मैं ने
बस एक शख़्स को माँगा मुझे वही न मिला
- बशीर बद्र 

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हम को न मिल सका तो फ़क़त इक सुकून-ए-दिल
ऐ ज़िंदगी वगर्ना ज़माने में क्या न था
- आज़ाद अंसारी 

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इस डूबते सूरज से तो उम्मीद ही क्या थी
हँस हँस के सितारों ने भी दिल तोड़ दिया है
- महेश चंद्र नक़्श 

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दौलत नहीं काम आती जो तक़दीर बुरी हो
क़ारून को भी अपना ख़ज़ाना नहीं मिलता
- मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

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Urdu Poetry: आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता

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