अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से
तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से
- जाँ निसार अख़्तर
हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस को भी देखना हो कई बार देखना
- निदा फ़ाज़ली
मिरी आह का तुम असर देख लेना
वो आएँगे थामे जिगर देख लेना
- जलील मानिकपुरी
वो जंगलों में दरख़्तों पे कूदते फिरना
बुरा बहुत था मगर आज से तो बेहतर था
- मोहम्मद अल्वी
Urdu Poetry: कैसा जादू है समझ आता नहीं, नींद मेरी ख़्वाब सारे आप के