Urdu Poetry: जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता
- निदा फ़ाज़ली

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मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
- सईद राही

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कुछ इस तरह से गुज़ारी है ज़िंदगी जैसे
तमाम उम्र किसी दूसरे के घर में रहा
- अहमद फ़राज़

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कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है
- गुलज़ार

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Urdu Poetry: यही जाना कि कुछ न जाना हाए, सो भी इक उम्र में हुआ मालूम

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