Urdu Poetry: दीवाना बे-पढ़े-लिखे मशहूर हो गया

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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काग़ज़ में दब के मर गए कीड़े किताब के
दीवाना बे-पढ़े-लिखे मशहूर हो गया
- बशीर बद्र 

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रहता था सामने तिरा चेहरा खुला हुआ
पढ़ता था मैं किताब यही हर क्लास में
- शकेब जलाली

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हमेशा तिनके ही चुनते गुज़र गई अपनी
मगर चमन में कहीं आशियाँ बना न सके
- मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी

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कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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Urdu Poetry: लफ़्ज़ों ने कई दिन से कोई बात नहीं की

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