Urdu Poetry: अब तो मिल जाओ हमें तुम कि तुम्हारी ख़ातिर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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अब तो मिल जाओ हमें तुम कि तुम्हारी ख़ातिर
इतनी दूर आ गए दुनिया से किनारा करते
- उबैदुल्लाह अलीम 

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मेरे घर के तमाम दरवाज़े
तुम से करते हैं प्यार आ जाओ
- अनवर शऊर

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बहुत दूर तो कुछ नहीं घर मिरा
चले आओ इक दिन टहलते हुए
- हफ़ीज़ जौनपुरी

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इश्क़ को नग़्मा-ए-उम्मीद सुना दे आ कर
दिल की सोई हुई क़िस्मत को जगा दे आ कर
- अख़्तर शीरानी

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Urdu Poetry: ये चाँद किस को ढूँढ़ने निकला है शाम से

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