Urdu Poetry: धूप निकली है बारिशों के ब'अद, वो अभी रो के मुस्कुराए हैं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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धूप निकली है बारिशों के ब'अद
वो अभी रो के मुस्कुराए हैं
- अंजुम लुधियानवी 

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महफ़िल में लोग चौंक पड़े मेरे नाम पर
तुम मुस्कुरा दिए मिरी क़ीमत यही तो है
- सय्यद हाशिम रज़ा 

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मुस्कुराने का यही अंदाज़ था
जब कली चटकी तो वो याद आ गया
- अज्ञात 

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दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
- नासिर काज़मी 

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Urdu Poetry: मैं उस के वादे का अब भी यक़ीन करता हूँ

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